जब हमारी दिशा सही होगी तो हमारी दशाएं भी अपने आप ठीक हो जाएंगी:स्वामी देवकीनंदन दास

जालंधर(योगेश कत्याल)
जब हमारी दिशा सही होगी तो हमारी दशाएं भी अपने आप ठीक हो जाएंगी। जन्म जन्मांतर में भटकनेे का एक ही कारण है कि अब तक हमें दिशा सही नहीं मिली या फिर हमने अभी तक अपनी दिशा का गलत चयन किया है।
यह विचार ग्रीन एवेन्यू कॉलोनी, बस्ती पीर दाद में स्थित श्रीगौरी शंकर मंदिर में गोपाष्टमी के दिन प्रारंभ हुई श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन में स्वामी देवकीनंदन दास जी ने व्यक्त किए। उन्होंने भागवत जी की महिमा को सुनाते हुए बड़ी सुंदर बात कही कि हमें भागवत कथा क्यों सुननी चाहिए, भागवत कथा हमारे जीवन में क्या बदलाव लाती है यह जानना अत्यावश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक हम सही रूप से इस बात को नहीं समझेंगे, तब तक हमारे अंदर भागवत कथा को सुनने की रुचि नहीं होगी। दूसरी बात कथा हम सुनते हैं लेकिन कथा को हम अपने हृदय में नहीं बिठाते। उनके अनुसार अगर हमने कथा को हृदय में बिठाया होता तो अवश्य ही हमारे जीवन में बदलाव हो गया होता। उन्होंने कहा कि अगर आज कुछ बदलाव दिखाई दे रहा है तो उस कथा को हृदय में धारण करके उस पर अमल करने के कारण है क्योंकि कथा तो हम बहुत सुनते हैं लेकिन उस पर अमल कम करते हैं।

उन्होंने बताया कि यही कारण है हमारे जीवन में बदलाव नहीं हो पा रहा। भगवान भी कथा के माध्यम से ही हमारे हृदय में जाते हैं और हमारे जीवन में बदलाव करते हैं। स्वामी जी के अनुसार यदि कथा को हमने अपने हृदय में नहीं बिठाया तो इसका मतलब हमने भगवान को ही छोड़ दिया। स्वामी जी ने यह भी कहा कि हम सब ज्यादातर लोग धर्म,अर्थ, काम और मोक्ष इन चार पुरुषार्थओं पर ध्यान देते हैं परंतु अगर हम देखें, इससे ऊपर भी एक पुरुषार्थ है जो हमारी आत्मा को छूता है। वास्तव में आनंद उसी में है, सुख उसी में है और वह है भगवान का प्रेम और भागवत का प्राकट्य। वेदव्यास जी महाराज को भागवत लिखने के बाद ही परम शांति मिली थी, क्योंकि यह आत्मा को छूता है, मूल कारण है कि हम सब भगवान के दास हैं, भगवान ही एकमात्र हमारे आराध्य हैं, हमारे पति हैं, भगवान का प्रेम पाना ही हमारे जीवन का चरम लक्ष्य है परंतु हम भटके हुए हैं, इसलिए इनके पीछे दौड़ रहे हैं तभी हमें शांति नहीं मिल रही, जिस दिन सही लक्ष्य की ओर अर्थात दिशा की ओर जाएंगे तो ही हमारी दर्शाएं सुधरेंगी। उसके उपरान्त फिर किसी प्रकार का कष्ट और दुख नहीं होगा।

राधे राधे और हरे कृष्ण महामंत्र की ध्वनि से सभी भक्तजन आनंद में डूब गए। इस अवसर पर राजेश अगिहिहोत्री, डॉ दविंदर शर्मा, शशि शर्मा, रवि शर्मा, चंद्र गुप्ता, मोनिका गुप्ता, चेतन भल्ला, ममता गुजराल, पूजा भल्ला, सुषमा शर्मा, विपन कुंद्रा, तेज प्रकाश, प्रदीप, राजेश कुमार, प्रॉमिला, मुनीश ठाकुर, वीरकांता गुप्ता, महिंदर भगत, सौरव सेठ, पूर्व पार्षद क्रीपाल सिंह बूटी, तेज कुमार दुबे, हैप्पी, कुलविंदर, शिव कुमार, गोलडी शरदा, चन्दर मोहन चोपड़ा, नीलू ठाकुर, कनिका, अनिल नागपाल, राहुल कुमार, ओम प्रकाश दुबे, राकेश दुबे, पवन, विवेक बब्बी, विनय शर्मा, कश्मीरा सिंह सुशील, सागर, सोनू आदि मौजूद थे।