जालंधर वेस्ट से जिताऊ उम्मीदवार तलाशना भाजपा के लिए कठिन ही नहीं असंभव

जालंधर(विशाल कोहली)
पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर लगभग सभी राजनैतिक पार्टियों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके साथ ही पूरे राज्य में सियासत का पारा भी चढ़ने लगा है। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ राजधानी दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर जारी किसानों के प्रदर्शनों तथा हाल ही में अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के बीच हुए गठबंधन के मद्देनजर भाजपा अकेले ही अपने दम पर आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है।
आज अगर हम बात जालंधर वेस्ट विधासभा क्षेत्र के मौजूदा कांग्रेस विधायक सुशील रिंकू की दिन-प्रतिदिन बढ़ती लोकप्रियता के चलते कांग्रेस के बढ़ते ठोस जनधार के कारण ही गत नगर निगम चुनावों में इस क्षेत्र के कुल 23 वार्डों में से 17वार्डों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों ने जीत प्राप्त की थी। अगर यह कहें कि विधायक रिंकू ने अपने पिता बाऊ राम लाल की मृत्यु के बाद राजनीति में जो मुकाम कायम किया है वो लगातार जारी है तो कोई भी गलत बात नहीं होगी। बूटा मंडी में डॉ. बी.आर. आंबेडकर कॉलेज का युद्ध स्तर पर हो रहा निर्माण भी विधायक रिंकू के प्रयासों से ही संभव हो सका है। बाबू जगजीवन राम चौक में श्री गुरु रविदास जी कम्युनिटी सेंटर का बनाए जाना भी विधायक श्री रिंकू की दूरदर्शिता का जीत-जागता प्रमाण है। कई दशकों से बरसात के दिनों में 120 फुट रोड पर हो रही जलभराव की समस्या से लोगों को निजात देने के उद्देश्य से लगभग 21 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा स्टॉर्म सीवरेज भी उनकी जनहितैषी कार्यशैली की साफ़-साफ़ तस्वीर दिखा रहा है। अपने निर्वाचन क्षेत्र के सभी वार्डों में एक समान विकास कार्य करवा विधायक श्री रिंकू ने अपनी कर्मठता और सक्रियता में कोई भी कमी नहीं आने दी।
ऐसे में भाजपा को इस क्षेत्र में जिताऊ उम्मीदवार तलाशने में अग्नि परीक्षा से गुजरना होगा। इस क्षेत्र की राजनीति पर नजर रखने वालों का मानना है कि भाजपा के पाले में ऐसा कोई भी कद्दावर नेता नहीं है जो क्षेत्र के मौजदा कांग्रेसी विधायक को चुनौती दे सके। भाजपा पार्टी आलाकमान को भी अभी तक कुछ समझ में नहीं आ रहा है। अब यह तो समय ही बताएगा कि भाजपा इस चुनावी चुनौती को कैसे साधती है? लेकिन वर्तमान राजनैतिक परिस्थितियां तो इस बात की गवाही देती नजर आ रही हैं कि विधायक श्री रिंकू की बढ़िया कारगुजारी के चलते कांग्रेस के बन चुके इस मजबूत किले को सेंध लगाना भाजपा के बस की बात नहीं है।
बता दें कि 2017 में इस क्षेत्र से कांग्रेस के मौजूदा विधायक सुशील रिंकू ने भाजपा के उम्मीदवार मोहिंदर भगत को 17000 से अधिक मतों से चुनावी हार का मजा चखाया था।

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