स्त्री रोग, वाल रोग एवं मूत्र जन्य रोगों पर सेमिनार आयोजित

लुधियाना( राजन मेहरा)
नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन की वूमेन फोर्म तथा फोर्टिस हॉस्पिटल, लुधियाना ने संयुक्त रूप से स्त्री रोग, वाल रोग एवं मूत्र जन्य रोगों पर सेमिनार करवाया। जिसमें डॉक्टर गुरसिमरन कौर तथा डॉक्टर जसप्रीत सिंह छावड़ा मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित हुए। डॉक्टर सारिका सोबती तथा डॉक्टर हरमन सोबती विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित थे। डॉ उषा करण थापर, डॉक्टर बबीता अग्रवाल, डॉक्टर प्रिंसी सेखों व डॉ शशि कालरा पैनल विशेषज्ञ नियुक्त किए गए। डॉ राजेश थापर, डॉक्टर रविंदर बजाज, प्रधान एवं सलाहकार नीमा ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में रक्ताल्पता तथा रक्त चाप नियंत्रण के लिए खास ध्यान देने की जरूरत होती है। वूमेन फोर्म की सचिव डॉ रेखा गोयल बजाज के अनुसार स्त्रियों में ब्रेस्ट कैंसर अधिक होने लगा है। ब्रेस्ट कैंसर पुरुषों में भी देखा गया है परंतु ज्यादातर यह स्त्रियों में ही पाया जाता है। सभी स्त्रियों को ब्रेस्ट कैंसर के प्रति और भी जागरूक होना चाहिए। यह जागरूकता ही है कि ब्रेस्ट कैंसर से मृत्यु दर कम हुई है।अतिथि वक्ता डॉक्टर गुरसिमरन कौर ने स्त्रियों को खुद ब्रेस्ट चेकअप के लिए जानकारी होने पर बल दिया। किसी प्रकार की गांठ, किसी तरह का बदलाव या असामान्य लक्षण होने पर तुरंत आपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए। जिन परिवारों में ब्रेस्ट कैंसर की हिस्ट्री हो उसमें परिवार की स्त्रियों को डॉक्टर की सलाह से मैमोग्राफी जरूर करवा लेनी चाहिए तथा इसमें शर्म नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर कौर ने आगे बताया कि सभी सर्जन अच्छे होते हैं, परंतु की स्त्रियों की प्रॉब्लम्स के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ को ही प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि वही आपको स्पेशल इलाज दे सकते हैं। गर्भवती स्त्रियों में खून की कमी होने पर उन्होंने बताया कि इसको खाने वाली दवाई से ही पूरा कर लिया जाता है , अगर दवाई माफक ना आए तो दवा की ख़ुराक़ कम करके या इंजेक्शन द्वारा खून की कमी को पूरा किया जा सकता है।गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप तथा एनीमिया माता तथा बच्चे के लिए हानिकारक हो सकते हैैं। मूत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जसवीर सिंह छावड़ा ने बताया कि पथरी ज्यादातर गुर्दा, मूत्र नाली या ब्लैडर में होती है। किरणों द्वारा पथरी को चूर्ण करके शरीर में से बाहर निकाल देना, ऑपरेशन करके या लेप्रोस्कोप के द्वारा शरीर में से पथरी का निष्कासन रोगी की अवस्था के अनुसार निश्चित करना होता है। लेप्रोस्कोपी से शरीर पर निशान अत्यधिक छोटे पढ़ते हैं । लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने बताया कि गुर्दा बदलने के ऑपरेशन में भी लेप्रोस्कोपी मदद ली जाती है। अब तो तकरीबन बहुत से ऐसे ऑपरेशन हैं जो लेप्रोस्कोप से किए जा सकते हैं । जिससे हॉस्पिटल में रोगी का स्टे कम हो जाता है , रिकवरी फास्ट हो जाती है तथा इंफेक्शन के चांस भी कम हो जाते हैं।
नीमा के सैक्ट्री डॉक्टर रणवीर सिंह व ऑर्गेनाइजिंग सैक्ट्री डॉक्टर नीरज अग्रवाल ने आए हुए मेहमानों का परिचय करवाया तथा डॉक्टर मीनू कोछड़ ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया। इस अवसर पर डॉ शिवाली अरोड़ा, डॉक्टर गजाला कादरी, डॉक्टर जसवंत कौर, डॉक्टर संगीता गुप्ता, डॉ ऋतु बंसल, डॉ नीतू दीवान, डॉ एचके खुराना, डॉ जीके खुराना, डॉ वंदना, डॉ शिवानी भाटिया व डॉक्टर वीरपाल कौर विशेष तौर पर उपस्थित हुए।

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