नाबालिग से रेप: बाबा के कर्मों का हुआ हिसाब, दोषी करार, हुई उम्र कैद

जालंधर (हलचल नेटवर्क)
जोधपुर के मनाई गांव स्थित आश्रम में दलित नाबालिग युवती से रेप के मामले में आसाराम एवं उसके दो सहयोगियों शरतचंद्र और शिल्पी को दोषी करार दिया है। हालांकि अन्य दो आरोपियों शिवा उर्फ सवाराम (आसाराम का प्रमुख सेवादार), प्रकाश द्विवेदी (आश्रम का रसोइया) को बरी कर दिया है। इनमें लोगों में से तीन आरोपियों शिवा, शिल्पी और शरद को अदालत ने जमानत दे दी थी। लेकिन, आसाराम के आश्रम के रसोइये का काम देख चुके प्रकाश द्विवेदी ने आसाराम की सेवा करने के मकसद से जमानत तक नहीं ली थी। हालांकि अब बरी होने के बाद आसाराम का यह सबसे प्रमुख सेवादार उसके साथ नहीं रह सकेगा। आसाराम पर एससी-एसटी ऐक्ट और पॉक्सो ऐक्ट समेत 14 धाराओं में केस चल रहा था। 56 महीने बाद आए इस फैसले में आसाराम को उम्र कैद सजा हो गई है।

आसाराम के प्रवक्‍ता नीलम दूबे ने कहा कि वह अपनी लीगल टीम से बात कर रहे हैं और आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे।
नाबालिग से रेप केस मामले में जोधपुर कोर्ट द्वारा आसाराम को दोषी करार देने के बाद पीड़िता के पिता ने कहा कि अब हमें न्याय मिला है। साथ ही उन लोगों को भी न्याय मिला है जिनका कत्ल कर दिया गया था या अपहरण किया गया था। मुझे पूरा भरोसा था कि आसाराम को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। उन्होंने कहा कि मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने इस लड़ाई में मेरी मदद की और साथ खड़े रहे।

बता दें कि गुजरात के सूरत की दो बहनों ने भी आसाराम और उनके बेटे पर बलात्कार का आरोप लगाया था। बड़ी बहन की शिकायत के मुताबिक, आसाराम ने 2001 से 2006 के बीच कई बार उनका यौन शोषण किया था, छोटी बहन ने नारायण साईं पर रेप का आरोप लगाया था। इसके बाद दिसंबर 2013 में नारायण साईं को भी गिरफ्तार किया गया था। वह सूरत जेल में बंद हैं।

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