दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने होली पर्व के लिए बनाए हर्बल रंग

इन रंगों से न ही किसी का नुकसान होगा और त्यौहार की गरिमा भी बनी रहेगी :साध्वी राधिका भारती
जालंधर(विनोद मरवाहा)
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा होली के विषय पर चर्चा करने हेतु एक बैठक बुलाई गई जिसमें संस्थान की प्रवक्ता श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी राधिका भारती जी ने कहा कि अपने निजी स्वार्थ के लिए आज हमने त्यौहारों क मूल रूप को ही बर्बाद कर दिया है। हमने मिलावट की सारी हदें पार कर दी हैं। होली के रंगों में अकसर क्रोमियम, सीसा जैसे जहरीले तत्तव, पत्थर का चूरा, खतरनाक रसायन इत्यादि पाए गएहैं। इन मिलावटी रंगों से एलर्जी, अन्य बीमारियाँ यहाँ तक कि कैंसर होने का खतरा भी होता है। विडम्बना है जहाँ रंगों से जि़न्दगी खूबसूरत होनी चाहिए थी वहाँ आज यह जानलेवा बन गए हैं।
साध्वी जी ने इतिहास के झरोखे में झांकते हुए बताया कि इन जानलेवा रंगों का परिणाम 8 मार्च २०१२ को मुबंई में देखने को मिला जब रंग विषाक्तता से सैंकड़ों बच्चे बीमार हो गए। पर्व का उल्लास दर्द के विलाप में बदल गया- जब लगभग 170 लोग विषाक्त रंगों का शिकार बन गए। 27 मार्च 2013- रात के 8 बजे दादर ठाणे जाने वाली लोकल ट्रेन में कुछ शरारती तत्त्वों ने दरवाजे पर खड़े यात्रियों पर रंग डाला। लेकिन वह रंग न होकरएक रसायिनक पाउडर था, जिसके आँखों में जाते ही लोगों की आँखें बुरी तरह जलने लगी। इस बैचेनी के कारण उनकी पकड़ ढ़ीली पड़ गई और 6 लोग चलती ट्रेन से गिर गए। एक 28 वर्षीय युवक अपनी जान गवां बैठा। साध्वी जी के अनुसार न केवल होली के रंग स्वार्थ, द्वेष, लोभ आदि विकारों के कारण घातक हुए हैं, बल्कि अंधविश्वास और रूढि़वादी परम्पराओं ने भी इस पर्व में दुर्गंध घोल दी है। इसलिए साध्वी जी ने बैठक बुला कर आए हुए सभी लोगों को प्रेरित किया कि यदि होली खेलनी है तो दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के प्रकल्प अंर्तक्रांति के द्वारा बनाए गए हर्बल रंगों से ही खेले जो रंग फूलों के द्वारा तैयार किए गए हैं। साध्वी जी ने कहा कि इन रंगों के द्वारा होली खेलने से न ही किसी का नुकसान होगा और त्यौहार की गरिमा भी बनी रहेगी।

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