चमकती रही राजनीति और बढ़ती रहीं अवैध कॉलोनियां

जालंधर(विनोद मरवाहा)
नेतागिरी, भ्रष्टाचार और अवैध कॉलोनियों के खेल का चोली-दामन का साथ है। शहर को बदसूरत कर रहीं अवैध कालोनियों को नेता आज भी संरक्षण दे रहे हैं। इन कॉलोनियों में विकास कराने के तमाम तरीके निकालते रहते हैं क्योंकि उन्हें जालंधर का भविष्य नहीं देखना है बल्कि अपना राजनीतिक भविष्य देखना है। इन कॉलोनियों को बढ़ने का एक कारण नगर निगम में कदम कदम पर फैला भ्रष्टाचार रहा है। नगर निगम अधिकारीयों की मिलीभगत से उस खेती की जमीन पर भी कंक्रीट के जंगल खड़े होने शुरू हो गए जहां कभी फसलें लहलहाती थीं। जो लोग पहले किराये पर रह रहे थे, वे इन कॉलोनियों में छोटा सा प्लॉट लेकर बसने लगे। यहीं से भ्रष्टाचार शुरू हुआ। इन कालोनियों के विस्तार के खेल में कई छुटभैया नेता भी सीधे तौर पर शामिल थे। वे खुद भूमाफिया भी थे। यह भी सच है कि बगैर निगम अधिकारीयों की मिलीभगत अवैध निर्माण नहीं हो सकता।

शहर में अनधिकृत कॉलोनियों काअवैध निर्माण तो दूर पॉश कालोनियों में भी अगर कोई निर्माण कार्य शुरू करता है तो इंस्पेक्टर स्तर के निगम कर्मी अपने एक प्यादे को लेकर वहां पहुँच जाते हैं । बगैर उनको रिश्वत दिए कोई एक ईंट भी नहीं जोड़ सकता है। एक निगम अधिकारी कहना है कि अगर कहीं कोई अवैध निर्माण करता है तो संबंधित क्षेत्र के इंस्पेक्टर की केवल इतनी जिम्मेदारी बनती है कि वे तुरंत उक्त मामले से अपने वरिष्ठ अधिकारी को अवगत करा दें और उसकी रिपोर्ट बनाकर उसकी सूचना दे दें, लेकिन अधिकतर ऐसा नहीं करते हैं। वे निर्माण कार्य करने वाले लोगों से अवैध वसूली में लग जाते हैं। नेता भी वोट बैंक के चलते इन कॉलोनियों में बिजली व पानी की सुविधाएं उपलब्ध करने में कोई भी कोर कसरनहीं छोड़ते। यह आज भी जारी है।

अगर पीछे मुड़कर देखा जाए तो जालंधर में अवैध निर्माण होने और अनधिकृत कॉलोनियां बसने का खेल गत कई दशकों से खेला जा रहा है। इस बात में रत्तीभर भी संदेह नहीं है कि अगर ईमानदारी बरती जाती तो अवैध निर्माण व अवैध कालोनियों को लेकर आज जालंधर के हालात बद से बदतर न होते जाते।

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