वेरीफिकेशन करने पर ही मिलेगा रिफंड

वेरीफिकेशन करने पर ही मिलेगा रिफंड
आयकर रिटर्न के बाद करना होता है अनिवार्य, 120 दिन की होती है समय-सीमा
जालंधर(विनोद मरवाहा)
आयकर रिटर्न दाखिल करने के बाद अगर वेरीफिकेशन करना भूल गए हैं तो सतर्क हो जाइए। ऐसा नहीं करने से रिटर्न तो इनवैलिड माना जाएगा ही साथ ही रिफंड भी नहीं मिल पाएगा।
इन दिनों वित्तीय वर्ष 2014-15 और 15-16 को लेकर रिटर्न दाखिल करने की कवायद चल रही है। वित्त वर्ष का अंतिम माह है, इसलिए गहमागहमी ज्यादा बनी हुई है। 31 मार्च विवरणी दाखिल करने की अंतिम तिथि है। नियमानुसार, रिटर्न दाखिल करने के बाद वेरीफिकेशन करना अनिवार्य होता है। इसकी समय सीमा 120 दिन होती है। किन्हीं कारणवश करदाता ऐसा करने से चूक जाते हैं। इसके बाद रिटर्न इनवैलिड माना जाता है तथा रिफंड भी नहीं मिल पाता है।
तीन तरह से वेरीफिकेशन किया जा सकता है।
पहला, रिटर्न की एक प्रति हस्ताक्षर करके सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) बेंगलुरू भेजनी पड़ती है। दूसरा ई-वेरीफिकेशन तथा तीसरा नेट बैंकिंग के द्वारा भी किया जा सकता है। बीते दो वर्षो से ई-वेरीफिकेशन अधिक होने लगा है। यह काफी आसान है। इसमें आधार से पैन को लिंक करने के बाद मोबाइल नंबर पर ओटीपी आ आता है, जिसे डालने से वेरीफिकेशन हो जाता है। इसे करने के बाद प्रति को सीपीसी भेजने के जरूरत नहीं होती है। इससे फायदा यह होता है कि प्रोसेसिंग जल्द होती है तथा रिफंड भी जल्द मिल जाता है। सीए मोहन लाल कुकरेजा के मुताबिक हालांकि ई-वेरीफिकेशन में कई बार समस्या भी आती है। अक्सर करदाताओं के पैन और आधार में दी गई जानकारी भिन्न होने से कार्य नहीं हो पाता है।

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