खरीफ की फसल पर एमएसपी मे वृद्धि करके सरकार ने दी देशभर के किसानों को सौगात : श्वेत मलिक

चंडीगढ़( हलचल नेटवर्क)
मोदी सरकार द्वारा खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों में 150 प्रतिशत तक की ऐतिहासिक बढ़ोतरी का पंजाब भाजपा ने जोरदार स्वागत करते इसे किसानों के लिए संजीवनी करार दिया है। पंजाब भाजपाध्यक्ष व राज्यसभा सांसद श्री श्वेत मलिक ने फैसले का स्वागत करते कहा कि 2022 तक किसानों की आय दोगुणी करने की दिशा में एमएसपी बढ़ाने का ये फैसला एक मील पत्थर है। श्री मलिक ने कहा कि इस फैसले के तहत मूंग दाल का समर्थन मूल्य 1400 रूपये क्विंटल बढ़ाया गया है। सूरजमुखी का भाव 1288 रूपये, रागी का 997 रूपये जबकि धान का भाव 200 रूपये प्रति क्विंटल बढ़ा दिया गया है। पंजाब के बडे हिस्से में होने वाली कपास का समर्थन मूल्य 1100 रूपये तक बढ़ा दिया गया है। श्री मलिक ने कहा कि इस ऐतिहासिक किसान उन्मुखी फैसले ने साबित कर दिया है केंद्र की भाजपा नीत मोदी सरकार किसानों की हालत सुधारने को कितनी गंभीर है और विगत में भी फसल बीमा योजना, गन्ना किसानों के लिए आठ हजार करोड़ा का राहत पैकेज, ई-नेम, मंडी योजना, यूरिया की सुविधाजनक उपलब्धता, सुनिश्चित कर, हैल्थ कार्ड जारी कर मोदी सरकार ने साबित किया है किसान उनकी सरकार के ऐजेंडे में सर्वोपरि हैं। श्री मलिक ने कहा की केंद्रीय सरकार ने कम अवधि के फसल कर्ज पर 660.5 करोड़ रुपये के ब्याज को माफ करने की घोषणा की है। यह राहत बीते वर्ष नवंबर और दिसंबर महीने के ब्याज पर लागू होगी। इस एलान से सहकारी बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों को फायदा होगा। केन्द्र सरकार ने किसानों को रबी की फसल के लिए आसान फसल लोन मुहैया करवायेगी। इसके लिए सरकार सहकारी बैंकों को अतिरिक्त पूंजी भी देगी।।
श्री मलिक ने इस एमएसपी वृद्धि को ने आजाद भारत के इतिहास में सबसे बड़ी वृद्धि बताया। उन्होंने कहा, किसान देश का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है लेकिन उन्हें कभी भी अपने उत्पाद की सही कीमत नहीं मिली। किसानों में हताशा और निराशा थी इसे प्रधानमंत्री मोदी ने समझा है, और इस ऐतिहासिक घोषणा की किसी ने यह कभी कल्पना नहीं की थी कोई सरकार ऐसा कदम उठाएगी। आजादी के बाद की किसी भी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य मे इतना बड़ा इजाफा नही किया ! पूरे देश के साथ साथ पंजाब के किसानों को मोदी सरकार के इन फैसलों से राहत मिलेगी। जो पिछले डेढ़ साल से पंजाब की कांग्रेस सरकार की वादा खिलाफी व किसान विरोधी नीतियों के चलते आत्महत्याएं करने को मजबूर हो रहे थे।

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