मिला इशारा, अब नहीं चल सकेगी जुगलबंदी

मिला इशारा, अब नहीं चल सकेगी जुगलबंदी
मौसम की तरह कहीं तुम बदल तो नहीं जाओगे के गाने पर नगर निगम चुनाव से पहले तो खूब जुगलबंदी हुई। नगर की सरकार को चलाने के लिए साथ-साथ विकास की कहानी भी गढ़ी। किस्से सुनाए और अब राह जुदा-जुदा सी हो गईं हैं। जिनको जनता ने चुना। उनको विकास की गाड़ी को दौड़ाने के लिए पसंद के चालक की जरूरत थी।

उम्मीद थी जिधर गाड़ी को ले जाएंगे, उधर ही चलेगी। इसलिए जुगाड़ बैठाई और खुद डिमांड कर ली चालक की। पकड़ ठीक थी। प्रदेश तक चलती थी, सो पसंद का चालक मिल गया। पहले तो साथ-साथ रहे। साथ में कुर्सियां लगतीं थीं। विकास के आयाम गढ़ने की कहानी बनाई, किस्से सुनाए जाने लगे। जब देखा कि गाड़ी चलाने वाले अब उनकी बात नहीं सुनते तो किनारा कर लिया।

अब चालक के खिलाफ अपने ही गुटबाजी करने में दिन-रात एक किये हुए हैं। पहले से ही कई मुद्दों पर जेब को लेकर सामंजस्य नहीं बैठा तो राह जुदा होने लगी साथ ही बिछड़ने की पटकथा लिखी जाने लगी। अब तो नगर की सरकार को चलाने वाले का कहना है कि सब स्वतंत्र हैं और अपनी बात रखने का सबको अधिकार है। अब तो दोनों संबंधों की कहानी आम होने लगी है।
विनोद मरवाहा

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