आखिरकार आैकात पर आया पाकिस्तान सेना के साथ राष्ट्रपति ने भी टेके घुटने, भारत से बातचीत करने को हुए तैयार

इस्लामाबाद/जम्मूः
आतंकवाद को पालित-पोषित कर सीमा पर लगातार गोलीबारी करने वाला पाकिस्तान आखिरकार भारत के सामने अपने घुटने टेकने ही पड़े. सोमवार को जहां पाकिस्तानी रेंजरों ने भारत के साथ शांति स्थापित करने के लिए जम्मू सेक्टर में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों के साथ फ्लैग बैठक की, वहीं पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने भारत के साथ बातचीत के जरिये कश्मीर समेत सभी द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाने की अपील की है.
इस्लामाबाद में रह रहे राजनयिकों के सम्मान में आयोजित इफ्तार पार्टी को संबोधित करते हुए हुसैन ने कहा कि युद्ध, धार्मिक, नस्लीय एवं भाषाई पूर्वाग्रह तथा वरिष्ठता की भावना विश्व को असामान्य स्तर पर ले आया है. उनके कार्यालय की आेर से जारी बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कश्मीर में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के उल्लंघन पर संज्ञान लेने को कहा और भारत से कश्मीर सहित सभी गतिरोध वाले मुद्दों पर बातचीत के जरिये सुलझाने की अपील की है.
उधर, बीएसएफ और पाकिस्तानी रेंजर्स के सैनिकों ने जम्मू सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा (आर्इबी) पर फ्लैग बैठक की और क्षेत्र में शांति कायम रखने के बारे में प्रतिबद्धता जतायी. बीएसएफ के एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान रेंजर्स के अनुरोध पर एक कमांडेंट-विंग कमांडेंट स्तर की फ्लैग बैठक बीएसएफ और पाकिस्तान रेंजर्स के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुचेतगढ़ इलाके में सीमा चौकी 938 पर सोमवार की सुबह साढ़े 11 बजे से 12 बजकर 10 मिनट तक हुई.
क रेंजर्स का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद इरफान ने किया, जबकि बीएसएफ का नेतृत्व ऑफिसर कमांडेंट (सेकेंड इन कमांड) हैप्पी वर्मा ने किया. उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के कमांडरों की बैठक में शिष्टाचार का आदान-प्रदान किया गया और रमजान के पवित्र महीने के लिए एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं. अधिकारी ने कहा कि बैठक के दौरान दोनों सीमा रक्षक बलों के कमांडरों ने अर्निया सेक्टर में दो दौर की बिना उकसावे की हालिया गोलीबारी और सीमा प्रबंधन से संबंधित अन्य नियमित मुद्दों समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की.
बैठक में आगामी 22 जून को सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर में आयोजित होने वाले चमलियाल मेला के बारे में भी चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि छोटे-मोटे मामलों का समाधान करने के लिए जब भी जरूरत पड़ने पर फील्ड कमांडरों के बीच तत्काल बातचीत करने का फैसला किया गया.

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