गुरुद्वारा साहिब भोपाल जठेरे में धार्मिक समागम आयोजित,सुंदर व साफ कापियां लिखने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया।

कपूरथला (एम.एस.शेरगिल,आकाश मट्टू)
शब्द गुरु प्रचार सभा व बाबा फतेह सिंह सेवा सोसायटी के सहयोग से सिमरन, गुरुबाणी अभ्यास से सबंधित लिखित कापियों को जमा करवाने सबंधी गुरुद्वारा साहिब भोपाल जठेरे में धार्मिक समागम आयोजित किया गया। समागम की शुरुआत बच्चों ने शब्द कीर्तन व धार्मिक रचनाओं से किया। उपरांत भाई भूपिंदर सिंह व भाई सतपाल सिंह के जत्थों ने संगतों को कीर्तन कर निहाल किया। समागम के दौरान बच्चों द्वारा महीना पहले प्राप्त की निशुल्क गुरुबाणी रचित कापियों को गुरद्वारा साहिब में जमा करवाई गई। इस मौके एडीसी (विकास) अवतार सिंह भुल्लर विशेष तौर पर शामिल हुए। भुल्लर ने सभा के सदस्यों व प्रबंधकीय कमेटी के सहयोग से सुंदर व साफ कापियां लिखने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया। समागम को संबोधित करते हुए भुल्लर ने कहा कि आज के समय में बच्चों को सार्थक धार्मिक ज्ञान की तरफ प्रेरित करना मुख्य जरुरत है क्योंकि यहीं ज्ञान उनके भविष्य जीवन को अच्छा नागरिक व मार्ग दर्शन करने में सहायक होगा। इस मौके अमृतसर से पहुंचे राजपाल सिंह व दिलबाग सिंह ने बच्चों को सिक्ख इतिहास, शहीद सिहों की जीवनी बारे विस्तारपूर्वक जानकारी दी। सम्मान समारोह में गुरुद्वारा साहिब भोपाल जठेरे प्रबंधक कमेटी व बाबा फतेह सिंह सेवा सोसायटी के सदस्यों की ओर से एडीसी (विकास) अवतार सिंह भुल्लर, राजपाल सिंह, तरविंदर मोहन सिंह भाटिया, दिलबाग सिंह, सुखजिंदर सिंह, चरणजीत सिंह वालिया, सुखविंदर मोहन सिंह भाटिया व अन्य सहयोगी सज्जनों को विशेष तौर पर सम्मानित किया गया। स्टेज सचिव की भूमिका निभाते हुए सुखविदंर मोहन सिंह भाटिया ने बताया कि जो बच्चे आज सम्मानित हुए है। उनके माता-पिता भी बधाई के पात्र है। जिन बच्चों की कापियां अभी अधूरी है। वह अगस्त महीने के पहले सप्ताह में होने वाले समागमों में अपनी कापियां जमा करवा सकते है और जिन बच्चों की कापिया साफ व सुंदर ढंग से लिखी होंगी। उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
इस अवसर पर जसपाल सिंह खुराना, जोध सिंह, गुरप्रीत सिंह बंटी वालिया, रछपाल सिंह, लखवीर सिंह, सरदूल सिंह, जोगिंदर सिंह, साहिबप्रीत सिंह, दविंदरसिंह, जसकरण सिंह, रविपाल सिंह, गुरवीर सिंह, गुरकमल सिंह, आशीषपाल सिंह, आशूप्रीत सिंह, सिमरन सिंह, धनप्रीत सिंह भाटिया, आत्मजीत सिंह वालिया, सूबा सिंह, बलवंत सिंह बल्ल, महिंदर सिंह के अलावा भारी संख्या में संगत मौजूद थे।

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