संघ कार्यकर्ताओं के लिए यह शहर बन रहा है मौत का कुआं

जालंधर(हलचल पंजाब)
गॉड्स ओन कंट्री कहे जाने वाले केरल के कन्नूर का जिक्र उसके खूबसूरत समुद्र तट के लिए न होकर अब पॉलिटिकल किलिंग के लिए होने लगा है। पिछले हफ्ते फिर कन्नूर से संघ के एक कार्यकर्ता की हत्या की खबर आई। संघ का दावा है कि अब तक केरल में उनके 400 से अधिक कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है।आखिर कन्नूर में ऐसा क्या है जो वह संघ कार्यकर्ताओं के लिए मौत का कुंआ बनता जा रहा है।
‘जानिए संघ को’ किताब के लेखक और संघ पर शोध करने वाले अरुण आनंद कहते हैं कि केरल में इस राजनीति हिंसा की कहानी 1940 के दशक में हुई जब संघ ने यहां पैर जमाने शुरू किए। राज्य में वामपंथियों ने इसका जबरदस्त विरोध किया और इसका नतीजा राजनीति हिंसा के ऐसे दौर के रूप में सामने आया जो सात दशक बाद आज तक जारी है।
विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष और संघ के वरिष्ठ प्रचारक पी. परमेश्वरम कहते हैं कि संघ परिवार के खिलाफ घोर नफरत कम्युनिस्ट मार्क्सवादियों के दिमाम में गहराई तक बैठी है। पहली बार यह 1948 में सामने आई थी जब तिरुवनंतपुरम में वामपंथी विचारों के छात्रों की तरफ से आयोजित विरोध जुलूस संघ की रैली में टूट पड़ा। जिसे गुरु गोलवलकर संबोधित कर रहे थे।
संघ प्रचारक और प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक जे. नंद कुमार कहते हैं कि कन्नूर में हमारे कार्यकर्ताओं पर हमलों की मुख्य वजह सीपीएम के खेमे को छोड़कर संघ का स्वयंसेवक बनना है। कन्नूर में हमारे अधिकांश कार्यकर्ताओं का संबंध अतीत में कम्युनिस्ट पार्टी से रहा है। उन्होंने कहा कि वहां संघ कार्यकर्ताओं के अलावा कांग्रेस और यहां तक कि सीपीआई कार्यकर्ताओं पर भी हमले हो रहे हैं। वह कहते हैं कि सीपीएम को यह गलतफहमी है कि संघ पर हमला करने से उन्हें अल्पसंख्यकों के वोट मिलेंगे। संघ पर हमला केरल के अल्पसंख्यकों का पूरा समर्थन हासिल करने की भी रणनीति है।

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