मोदी सरकार दलितों और कमजोर तबके के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध: सांपला

होशियारपुर(हलचल नेटवर्क)
लोक सभा में एस.सी./एस टी कानून के सविंधान में दर्ज मूल स्वरूप से छेड़छाड़ न करने के सरकार द्वारा प्रस्ताव पारित करने पर केन्द्रीय राज्य मंत्री विजय सांपला को होशियारपुर पधारने पर विभिन्न दलित संगठनों की तरफ से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर श्री विजत सांपला ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार दलितों और कमजोर तबके के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अब इस विधेयक के अंतर्गत जांच अधिकारी को एससी/एसटी अधिनियम के अंतर्गत नामजद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए किसी अधिकारी के मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने बताया कि इसके अलावा एससी/एसटी अधिनियम के अंतर्गत आरोपी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के लिए प्रारंभिक जांच की भी जरूरत नहीं होगी।
श्री सांपला ने कहा कि एससी- एसटी कानून पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद से ही केंद्र सरकार ने तत्परता और सोच- समझ के साथ काम किया और दलितों के अधिकारों के संरक्षण के लिए एक प्रभावी पुनर्विचार याचिका दाखिल की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अनुसूचित जाति के सांसदों से मिलकर उन्हें भरोसा दिलाया था कि सरकार हमारे दलित बहनों और भाइयों की भलाई और अधिकारों के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
श्री सांपला के अनुसार भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा दलित समुदाय की भावनाओं की कदर की है। जबकि कांग्रेस सरकारों ने हमेशा हमारे गरीब दलित लोगों का वोटों की खातिर इस्तेमाल किया है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर समाज में ‘ तनाव भड़काने’ का आरोप लगाया और सवाल किया कि केंद्र में लंबे समय तक सत्तारूढ़ रहने वाली कांग्रेस ने आखिरकार दलित समाज के लिए क्या किया।
इस अवसर पर जिला प्रधान विजय पठानिया, पूर्व जिला प्रधान डा.रमन घई, डी.एस बागी, मंडल प्रधान मनोज शर्मा, अश्विन शर्मा, देहाती मंडल प्रधान नवजिंदर बेदी, पार्षद सुरेश भाटिया बिट्टू, रमेश डडवाल मेशी, नरिंदर कौर, युवा मोर्चा प्रधान रोहित सूद हनी, संजीव तलवाड़, सर्वजीत कौर, पूजा वशिष्ठ, विनोद परमार, अनंदबीर सिंह, भारत भूषण वर्मा, गुरमिंदर कौर, रोबिन सांपला उपस्थित थे।
बता दें कि इसी साल 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके गोयल और जस्टिस उदय उमेश ललित की पीठ ने एससी/एसटी एक्ट में बड़ा बदलाव करते हुए आदेश दिया था कि किसी आरोपी को दलितों पर अत्याचार के मामले में प्रारंभिक जांच के बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है जबकि पहले केस दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी का प्रावधान था।