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शिरोमणि अकाली दल ने डेरा मुखी को बचाने के लिए बेअदबी केस को दबाया : परगट सिंह

चंडीगढ़/हलचल नेटवर्क
विधायक और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी सचिव पद्मश्री परगट सिंह ने आज चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 2015 के बेअदबी मामलों पर इंसाफ में हो रही देरी को लेकर पंजाब सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने 2017 में सरकार बनाते समय इन मामलों में इंसाफ दिलाने का स्पष्ट वादा किया था और उसी दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

पदमश्री परगट सिंह ने उधर, अकाली दल और भाजपा से बेअदबी मामले में अपना-अपना स्टैंड क्लीयर करने के लिए कहा। भाजपा बार-बार डेरा मुखी को परैल दे रही, क्या भाजपा डेरा मुखी को दोषी नहीं मानती है।
परगट सिंह ने कहा कि मेरे खिलाफ धरना देने की बजाए शिरोमणि अकाली दल को चाहिए कि साढे तीन साल बाद भी इंसाफ नहीं दे रही आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के घर के बाहर धरना दें। एक धरना अपने अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल के घर के बाहर देना चाहिए, जो आज भी इन मुद्दों पर राजनीति कर रहा है, ताकि यह मामले यूं ही लंबित होते रहें।

परगट सिंह ने साथ ही इस मामले में कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार में इस मामले में काफी ठोस कदम उठाए गए थे। जस्टिस रणजीत सिंह कमीशन का गठन कर कार्रवाई शुरू की गई थी। राहुल गांधी ने खुद पंजाब आकर जनता को भरोसा दिलाया था कि दोषियों को सज़ा मिलेगी। जब कार्रवाई में ढिलाई दिखी, तब कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री तक बदला और एसआईटी की जांच को तेज़ किया।

परंतु, आम आदमी पार्टी सरकार के आने के बाद से केसों की फाइलें दबा दी गईं। ढाई साल तक डेरा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं दी गई। विधानसभा में बार-बार सवाल पूछे गए, लेकिन सरकार चुप रही। इसमें आप पार्टी के 95 में से किसी विधायक ने कभी कोई आवाज नहीं उठाई। परगट सिंह ने खुलासा किया कि आप की मिलीभगत से डेरा प्रेमियों के केस पंजाब से बाहर ट्रांसफर किए गए, और खुद एचएस फुल्का जैसे नेता ने इस साज़िश की जानकारी सार्वजनिक की।

परगट सिंह ने बताया कि बेअदबी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जब अकाली दल के बादल परिवार के साथ समझौता करते बेअदबी मामले की जांच को ढीला किया तो हम कुछ इंसाफ पसंद विधायकों ने मिलकर कैप्टन को हाईकमान से कह कर पद से मुक्त कराया।

मुख्यमंत्री चन्नी के समय एसआईटी की जांच तेज हुई

सौ दिन के लिए मुख्यमंत्री बने चरणजीत सिंह चन्नी ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कई अहम कदम उठाए। इस दौरान जो भी कर सकते थे किया।
-नवंबर -2021 में एसआईटी की टीम डेरा मुखी से पूछताछ के लिए सुनारिया जेल पहुंची।
-इसी तरह दिसंबर में दोबारा टीम पहुंची।
-जनवरी 2022 में फरीदकोट अदालत में डेरा मुखी के खिलाफ सप्लीमैंटरी चलान पेश किया।
-2 मार्च 2022 को फिर एसआईटी की टीम सुनारिया जेल पहुंची।
भगवंत मान ने बतौर गृहमंत्री फाइल को दबा दिया

परगट सिंह ने कहा कि इसके बाद मई 2022 में पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आ गई। डेरा मुखी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी लेने के लिए फाइल बतौर गृह मंत्री मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को सौंपी गई। मैंने इस मामले में 2022 दिसंबर में भगवंत मान से बतौर गृह मंत्री मुलाकात की। जिसका सवाल पिछले दिनों में विधानसभा में भी उठाया। परगट ने कहा कि मैंने इस मामले में तीन बार विधानसभा सत्र में बेअदबी संबंधी अपनी बात रखी।
सुखबीर ने एक बार भी डेरा मुखी का नाम नहीं लिया

उन्होंने अकाली दल को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि सुखबीर बादल ने आज तक एक बार भी डेरा प्रमुख का नाम नहीं लिया, क्योंकि उनका मकसद सिर्फ अपनी बठिंडा सीट को बचाना है, न कि गुरु साहिब की बेअदबी पर इंसाफ दिलाना। उन्होंने कहा कि 2015 के बेअदबी केस में सिख नौजवानों को फंसाने की कोशिश की गई।इन सभी बेअदबी केसों के पीछे भाजपा का हाथ बताते हुए परगट सिंह ने कहा कि भाजपा को भी चाहिए कि वह अपना स्टैंड क्लीयर करे। भाजपा ने हमेशा पंजाब के खिलाफ ही काम किया है। अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने भी भाजपा की शह पर ही इन डेरा मुखी को दोषी नहीं ठहराया।
अमन अरोड़ा, हरपाल चीमा और कुलतार संधवां – क्यों चुप हैं?
परगट सिंह ने सवाल किया कि आज आम आदमी पार्टी के नेता – अमन अरोड़ा, हरपाल चीमा और कुलतार संधवां – क्यों चुप हैं? क्यों कोई विधायक गुरु साहिब के इंसाफ के लिए आवाज़ नहीं उठा रहा? यही लोग थे जो विधानसभा में तीन महीने में इंसाफ दिलाने की बात करते थे। अब वह सभी इस मामले में बोलने से भी कतरा रहे हैं।

परगट सिंह ने दो-टूक कहा कि “यह केवल राजनीतिक मामला नहीं, यह हमारी आस्था, हमारी पहचान और हमारी पीड़ा का सवाल है। जब तक दोषियों को सज़ा नहीं मिलेगी, पंजाब का मन शांत नहीं होगा,”

बेअदबियों की शुरुआत ही अकाली दल के समय में हुई
परगट सिंह ने कहा कि अकाली दल के समय में ही इसकी शुरुआत हुई। उन्होंने बताया कि 2007 में गुरु साहिब का स्वांग रचाने वाले डेरा मुखी के केस में कांग्रेस ने 2012 के चुनाव से कुछ दिन पहले कैंसलेशन रिपोर्ट दायिर की। 2014 में डेरा मुखी को केस में डिसचार्ज किया। उसके बाद बेअदबी की साजिश शुरू हुई। जून 2015 गुरु साहिब की बीड़ चोरी हुई। डेरा प्रेमियों पर शक होने के बावजूद बादल परिवार ने जत्थेदार सहिबान से माफी दिलाई। उसके बाद पोस्टर लगे और फिर बेअदबी की घटनाएं हुईं।