पहले सड़क पर टैक्सी चलाकर सेवा, फिर विधानसभा में बैठकर सेवा, और अब अदालत से सेवा का प्रमाणपत्र – “दोषी”! जालंधर/ विनोद मरवाहा
वाह रे लोकतंत्र! क्या शानदार सफर तय कर लिया आम आदमी पार्टी के विधायक जी ने। पहले सड़क पर टैक्सी चलाकर सेवा, फिर विधानसभा में बैठकर सेवा, और अब अदालत से सेवा का प्रमाणपत्र – “दोषी”!
ऐसा त्रिस्तरीय सेवा मॉडल दुनिया में शायद ही कहीं मिलेगा। कोई कहे तो इसे “सेवा का संपूर्ण चक्र” भी कहा जा सकता है। मतलब पहले टैक्सी चलाओ, फिर विवाद करो, फिर मीडिया में चर्चा बनो, और अंत में अदालत से दंडित होकर भी जनता के बीच “बेचारा” बनकर लौटो। पहले सड़क पर नियम तोड़े गए, फिर समाज की मर्यादा तोड़ी गई और अंत में अदालत ने कानून का पाठ पढ़ाया। जब सेवा का विस्तार इतना हो जाए कि सड़क से लेकर सत्ता तक पहुँचे और अंततः अदालत से ‘दोषी’ का प्रमाणपत्र मिले – तब समझिए सेवा का यह मॉडल भारतीय राजनीति की सबसे हास्यास्पद उपलब्धि बन चुका है।
जनता आश्चर्य में है – क्या यही है वो जिन्होंने सेवा जिसके लिए वोट माँगे गए थे? क्या यही वो आदर्श है जिसकी तस्वीरें पोस्टरों में चमक रही थीं? और क्या अब ‘जनता का सेवक’ शब्द का मतलब बदलकर ‘जनता की शर्म’ कर दिया जाए? क्या हम ऐसे नेताओं को सिर्फ इसलिए चुनते हैं क्योंकि वे बोलना जानते हैं ?
यह व्यंग्य नहीं, हमारे समय का आईना है। सेवा की जगह स्वार्थ, जिम्मेदारी की जगह दिखावा और नेतृत्व की जगह छल-कपट ने ले ली है। अदालत ने फैसला सुना दिया – अब जनता को फैसला करना है कि सेवा चाहिए या तमाशा।