
नई दिल्ली(हलचल नैटवर्क)
नोटबंदी के दौरान जिन लोगों ने एक से ज्यादा अकाउंट खुलवाकर उनमें 50 हजार से ज्यादा कैश जमा कराया, उनके खिलाफ इनकम टैक्स विभाग ने जांच शुरू की है। इसके पीछे सरकार का मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को टैक्स के दायरे में लाना है। ऐसे लोगों को एसएमएस/ईमेल भेजकर आमदनी का ब्यौरा मांगा जाएगा, जिसका जवाब 15 दिन में देना होगा। जांच की जाएगी कि क्या ये इनकम टैक्स के दायरे में आते हैं। दायरे में होने के बाद भी अगर ये टैक्स नहीं भरते तो इन्हें टैक्स के दायरे में लाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो टैक्स चोरी का केस भी दर्ज किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, नोटबंदी के दौरान कई लोगों ने चार या पांच अकाउंट खुलवाए थे और इनमें से किसी में 40 तो किसी में 30 हजार जमा करा दिए। इन्होंने एक अकाउंट में 50 हजार या ज्यादा जमा नहीं कराए, क्योंकि उसके लिए पैन जरूरी होता है।
आमदनी मगर नहीं देते टैक्स
इनकम टैक्स विभाग के सूत्रों के अनुसार नाेटबंदी की जांच के दौरान यह बात सामने आईं है कि कई लोगों ने एक नहीं बल्कि चार या पांच बैंक अकाउंट खुलवाएं आैर इनमें से किसी में 40,000 आैर किसी में 30,0000 रुपये जमा कराएं। लोगों ने एक अकाउंट में 50,000 रुपये या उससे ज्यादा राशि जमा नहीं करवाई, क्योंकि 50,000 रुपये या उससे ज्यादा कैश जमा करवाने पर पैन नंबर देना जरूरी होता है। अगर कुल जमाराशि देखी जाए तो यह 50,000 रुपये से ज्यादा बैठती है।
मौजूदा समय में करीब 3.94 करोड़ लोग ही इनकम टैक्स देते हैं। इनमें वेतनभोगी टैक्स पेयर्स की संख्या करीब 60 से 65 प्रतिशत है। इनकम टैक्स विभाग ने अगले वित्त वर्ष यानी 2017-18 में इनकम टैक्स पेयर्स की संख्या बढ़ाकर 5 करोड़ करने का लक्ष्य रखा है।












































