
नई दिल्ली (हलचल नेटवर्क)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को रक्षा क्षेत्र में बड़ी कामयाबी मिली है। इस कार्यक्रम के तहत 300 नाग एंटी-टैंक मिसाइलें बनाई गई हैं। ये जमीन से हमला करने वाली नाग एंटी-टैंक मिसाइल का वर्जन हैं, जिनको जल्द ही भारतीय सेना में शामिल किया जाएगा। इससे भारतीय सेना की दुश्मन के बख्तरबंद बल से मुकाबला करने की क्षमता में काफी इजाफा होगा।
भारतीय सेना को नाग एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों और लॉन्च व्हीकल का लंबे समय से इंतजार है। नाग एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम उन पांच मिसाइल सिस्टम में से एक है, जिनको भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन (DRDO) ने 1980 के दशक में विकसित करने की योजना बनाई थी। हालांकि कुछ कारणों से यह लटकता चला गया।
इनकी कुल कीमत करीब पांच सौ करोड़ रुपये बताई जा रही है। नाग मिसाइलों को NAMICA से लॉन्च किया जाता है। NAMICA व्हीकल से एक समय में छह मिसाइलों को ले जाया जा सकता है। ये नाग मिसाइलें सात से आठ किलोमीटर की दूरी पर दुश्मन के टैंक और इनफ्रैंट्री कॉम्बैट व्हीकल को तबाह कर सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक सेना को ऐसी करीब 3,000 मिसाइलों की जरूरत है। हालांकि सेना इन नाग मिसाइलों का फिर से परीक्षण करेगी. अगर सेना परीक्षण के बाद संतुष्ट होती है, तो इन मिसाइलों के और ऑर्डर देगी।











































