
जालंधर(विनोद मरवाहा)
गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन सड़कों पर आपको ऐसे वाहन दिख जाएंगे जिससे काफी धुआं निकलता है। दरअसल, महानगर में कुछ जगहों पर बिना वाहनों की जांच किए ही प्रदूषण नियंत्रण का सर्टिफिकेट मिल जाता है। इसके बदले में वाहन चालकों से 50 रुपये चार्ज किए जाते हैं। इतना ही नहीं वाहनों का प्रदूषण चेक करने वाले भी सर्टिफिकेट चेक कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। पुलिस प्रदूषण नियंत्रण स्लिप न होने पर 1000 रुपये का चालान करती है। वह सिर्फ स्लिप की वैधता देखती है।
सिटी में बढ़ रहे प्रदूषण का एक बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं है। नियमों के मुताबिक 6 महीने में वाहनों की जांच जरूरी होती है। यदि वाहन तय मात्रा से ज्यादा प्रदूषण फैला रहा है तो उसे स्लिप नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन कुछ प्रदूषण जांच केंद्रों से ये पर्ची आराम से मिल जाती है।
एक प्रदूषण जांच केंद्र के संचालक ने अपना नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि लोगों का जोर स्लिप लेने पर रहता है। उनका प्रदूषण से कोई लेना-देना नहीं है। कुछ जगहों पर तो कंप्यूटर से प्रदूषण की मात्रा को कम भी लिख देते हैं। वहीं, प्रदूषण की स्लिप न होने पर ट्रैफिक पुलिस 1000 रुपये का जुर्माना करती है। चालान करने वाले अधिकारी सिर्फ स्लिप की एक्सपायरी डेट ही चेक करते हैं।
बेहतर हो कि शासन-प्रशासन के उच्च पदों पर बैठे लोग यह समझें कि बढ़ता वायु प्रदूषण शहरी जीवन के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में उभर आया है।












































