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हाई कोर्ट ने कहा ‘खोलो’, प्रशासन ने कहा देख रहे है’ – लतीफपुरा की बंद सड़क बनी मजाक

हाई कोर्ट ने कहा ‘खोलो’, प्रशासन ने कहा देख रहे हैं – लतीफपुरा की बंद सड़क बनी मजाक
जालंधर/विनोद मरवाहा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जालंधर के लतीफपुरा में सड़कों पर अवैध कब्जों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए जालंधर के डिप्टी कमिश्नर (डी.सी.) को एक महीने के भीतर सभी कब्जे हटाकर ट्रैफिक बहाल करने के निर्देश दिए थे। यह फैसला मॉडल टाऊन की ज्वाइंट एक्शन कमेटी और सोहन सिंह द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया था ।

माननीय पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में ने बड़े जज़्बे से आदेश दिया था – “रास्ता खोलो, आम आदमी परेशान है।” पर ज़मीनी हकीकत ने जैसे कान में रूई डाल ली हो। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश की महीनों बीत गए, पर रास्ता आज भी बंद पड़ा है। लगता है आदेश सिर्फ़ अख़बारों में प्रकाशित करने के लिए था, ज़मीन पर लागू करने के लिए नहीं।
लोग रोज़ाना परेशान हो रहे हैं। कोई घूम कर काम पर जा रहा है, कोई अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने में देर कर रहा है। लेकिन प्रशासन के पास समय है — फाइलें पलटने, नोटशीट बढ़ाने, और बैठकें करने का। सुनने में आया है कि “प्रक्रिया जारी है” – यानी प्रक्रिया इतनी लंबी है कि रास्ता खुद थक कर आराम कर रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अदालत का आदेश तो पढ़ लिया गया, मगर शायद यह भी लिखा होगा – “खोलना ज़रूरी नहीं है, बस आदेश दे दो”! कई लोग हँसी में कहते हैं कि शायद रास्ता भी सोच रहा है – “इतनी भीड़, इतना शोर… मुझे बंद रहकर शांति चाहिए।”

पर यह मामला केवल हँसी का नहीं। यह उस व्यवस्था का उदाहरण बन चुका है जो आदेशों पर हस्ताक्षर कर देती है, पर लागू करने की ज़िम्मेदारी से कतराती है। न्यायालय की प्रतिष्ठा और जनता की उम्मीदें कागज़ों में उलझ कर रह गई हैं।
अब सवाल यही है – क्या आदेश केवल समाचारों की सुर्खियाँ बनाने के लिए होता है, या सच में आम आदमी की राहत के लिए?
जब तक रास्ता नहीं खुलता, प्रशासन की ‘व्यस्तता’ और जनता की ‘मजबूरी’ का यह नज़ारा चलता रहेगा।