
जालंधर(विनोद मरवाहा)
एटीएम, चेकबुक या फिर डेबिट-क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल महंगा हो सकता है। बैकिंग सेवाएं जीएसटी लगने के कारण महंगी हो सकती है। दरअसल सरकार की नजर में एटीएम, चेकबुक या फिर डेबिट कार्ड की सुविधा देकर बैंक आपको सर्विस देता है और इस सर्विस के एवज में बैंक आपसे कहता है कि आप अपने खाते में एक तय मिनिमम बैलेंस जरूर रखें। सरकार का मानना है कि ये मिनिमम बैलेंस एक तरह से सर्विस चार्ज है। इसलिए इस पर सर्विस टैक्स बनता है।
इसी आधार पर वित्त मंत्रालय के तहत आने वाला डायरेक्टरेट जनरल ऑफ गुड्स एंड सर्विस टैक्स इंटेलीजेंस यानि डीजीजीएसटी ने सभी बड़े बैंकों से कहा है कि वह इस पर जीएसटी दें। इस बारे में आईबीए के साथ बैंकाें की दो राउंड की मीटिंग हो चुकी है।
बैंकों से कहा गया है कि या तो वे मिनिमम बैलेंस की शर्त हटाएं या फिर एटीएम, चेकबुक आैर डेबिट-कार्ड के इस्तेमाल पर जीएसटी दें। बैंक मिनिमम बैलेंस की शर्त हटाने के मूड में नहीं है। दरअसल इस मामले पर टैक्स विभाग की नजर तब पड़ी जब बैंकों ने मिनिमम बैलेंस नहीं रखने वालों से चार्ज वसूलना शुरू कर दिया। कुछ बैंकों ने पेनल्टी लगाना शुरू कर दिया।
मौजूदा नियमों के मुताबिक अगर आप स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाता धारक हैं और आपके खाते में मंथली मिनिमम बैलेंस 1 लाख रुपये है तो आप जितने चाहें एटीएम ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। अगर मिनिमम बैलेंस 1 हजार रुपये से कम है तो हर महीने स्टेट बैंक के एटीएम से 5 बार और दूसरे एटीएम से 3 बार ही मुफ्त ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। इससे ज्यादा ट्रांजैक्शन करने पर आपको पैसे देने पड़ते हैं। यानी मिनिमम बैलेंस के एवज में ही आपको मुफ्त ट्रांजैक्शन की सुविधा मिलती है। इसलिए टैक्स विभाग मिनिमम बैलेंस पर टैक्स वसूलना चाहता है।
एक बैंक के उच्चाधिकारी का कहना है कि मिनिमम बैलेंस की शर्त को हटाने का सवाल नहीं उठता। इस वक्त बैंकों की वित्तीय हालात वैसे भी ठीक नहीं है। अगर मिनिमम बैलेंस की शर्त को हटाया गया तो बैंकों के पास नकदी की समस्या खड़ी हो जाएगी। ऐसे में अगर सरकार नहीं मानी तो बैंकों को एटीएम, चेकबुक आैर डेबिट-क्रेडिट के इस्तेमाल को थोड़ा महंगा करना होगा।बैंकों से कहा गया है कि या तो वे मिनिमम बैलेंस रखने की शर्त हटाएं या फिर एटीएम, चेकबुक आैर डेबिट-कार्ड के इस्तेमाल पर जीएसटी दें।












































