
जालंधर(विनोद मरवाहा)
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी की मुश्किलें बढ़नेवाली है. इस वर्ष जुलाई में राष्ट्रपति के चुनाव होनेवाले हैं. कयास लगाया जा रहा था कि जोशी और आडवाणी इस पद के लिए प्रबल दावेदार हैं, लेकिन यह दावेदारी धरी की धरी रह सकती है.
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी में इससे कोई कानूनी अड़चन नहीं है, लेकिन मामला नैतिकता और राष्ट्रपति पद की गरिमा का है. संविधान विशेषज्ञ कहते हैं कि इन नेताओं के खिलाफ आरोप ट्रायल का विषय है. ट्रायल के बाद यह तय होगा कि ये दोषी हैं या नहीं. ऐसे में कानूनी तौर पर चुनाव लड़ने को लेकर कोई अड़चन नहीं है.









































