
जालंधर(विनोद मरवाहा)
फेसबुक की शुरुआत हार्वर्ड के छात्र मार्क जुकेरबर्ग ने की थी। आपको देशभर में फेसबुक के हजारों दीवाने मिल जाएंगे। वर्ष 2004 में चार फरवरी को जब फेसबुक को शुरू किया गया था तब इसका नाम द फेसबुक था। अगस्त 2005 में इसका नाम फेसबुक कर दिया गया। चूंकि अन्य भाषाओं के साथ हिन्दी में भी काम करने की इसमें सुविधा है। यही वजह रहा कि भारत में भी यह तेजी से लोकप्रिय होता चला गया और आज हर कोई इस पर मौजूद है। इनमें कई ऐसे लोग व सं
गठन शामिल हैं, जो माध्यम का इस्तेमाल कर विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर काम कर रहे हैं। न सिर्फ असहाय लोगों की हर तरह से मदद कर रहे हैं, बल्कि खुद नजीर बन रहे हैं। मार्क जकरबर्ग ने वर्ष 2018 के लिए एक संकल्प लिया है। गत दिनों उन्होंने कहा था कि हम सारी गलतियां तो नहीं रोक पाएंगे, लेकिन अभी हमारी पॉलिसी और टूल्स के दुरुपयोग की कई गलतियां की जा रही हैं।अगर इस साल हम सफल रहे तो 2018 का एक अच्छा अंत होगा।












































