
नई दिल्ली(हलचल नेटवर्क)
दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क भारतीय रेल के बदबूदार और ढंग से काम नहीं करने वाले शौचालय जल्द ही बीते जमाने की बात हो जाएगी। भारतीय रेल अब अपने बायो-टॉयलेट को आयातित बायो-वैक्यूम टॉयलेट में अपग्रेड कर रहा है। यह टॉयलेट वैसा ही है, जैसा हवाई जहाजों में होता है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी और कहा कि शुरू में राजधानी और शताब्दी जैसी महत्वपूर्ण रेलगाड़ियों के 100 डिब्बों में यह टॉयलेट लगाए जाएंगे। इसके लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है । ये बॉयो-वैक्यूम टॉयलेट दुर्गंधरहित होंगे और इससे पानी का इस्तेमाल 20 गुणा तक कम हो जाएगा।
टॉयलेट जाम से मिलेगा छुटकारा
अधिकारी ने यह भी कहा कि चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में बॉयो-वैक्यूम टॉयलेट लगाकर 500 डिब्बे बनाए जा चुके हैं जिन्हें राजधानी और शताब्दी जैसे प्रीमियम ट्रेनों के साथ जोड़ा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के टॉयलेट के जाम होने की संभावना भी कम होगी। रेलवे द्वारा वर्तमान बॉयो-टॉयलेट को अपग्रेड करने की पहल यात्रियों द्वारा लगातार टॉयलेट के जाम होने की शिकायतों के मद्देनजर शुरू की गई है। वर्तमान में रेल डिब्बों में लगे बॉयो-टॉयलेट के प्लास्टिक बोतल, कागज व अन्य चीजें फेंकने से जाम होने की शिकायतें मिल रही हैं।
पानी की होगी बचत
अधिकारी ने नए टॉयलेट की जरूरत के बारे में कहा, ‘पानी की बचत करना रेलवे की प्राथमिकता है। टॉयलेट में हर फ्लश के लिए 15 लीटर पानी की जरूरत होती है जबकि बॉयो-वैक्यूम टॉयलेट को केवल एक लीटर पानी की जरूरत होगी और सारा मल वैक्यूम के द्वारा खींच लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इन टॉयलेटों का कुछ ट्रेनों में पॉयलट आधार पर परीक्षण किया गया था।


































